January 03, 2015

हौंडा ऐक्टिवा 125

हौंडा टू व्हीलर्स ने एक नई सवारी पेश की थी दुपहिया बाज़ार में, ये अहम लौंच है या नहीं, इसके बारे में तो बाद में ही पता चलेगा। लेकिन सवारी को चलाना तो ज़रूरी था, ये समझने के लिए कि बेस्टसेलर को और बेहतर कैसे किया जा सकता है। जिस एक्टिवा को सालों से हमने स्कूटर बाज़ार पर राज करते देखा है, यही नहीं, हाल के वक्त में बेस्टसेलर मोटरसाइकिलों को भी पछाड़ दिया। 
तो पहली बार बल्कि हौंडा टू व्हीलर्स ने 125 सीसी का स्कूटर उतारा है। और स्कूटर को देखें तो इसमें अलग से ज़िक्र है इसके इंजिन का। इसका नाम ही दिया गया है, ऐक्टिवा 125। जिसे चलाने के लिए निकला दिल्ली की गर्म सुबह में। मौसम ने तो कहानी थोड़ी गड़बड़ कर दी थी लेकिन फिर भी इतनी दूरी चला ही लिया कि इस नए पैकेज की शुरूआती राइड के बारे मे जानकारी दी जा सके। 

पहले लुक के बारे में बताएं तो बहुत ज़्यादा फ़र्क नहीं लगेगा आपको मौजूदा ऐक्टिवा और नए ऐक्टिवा में। लेकिन नज़दीक जाएं तो इसके अगले हिस्से में लगे क्रोम से लगेगा कि कुछ अलग और नया है। फिर किनारे से देखें तो पता चल जाएगा कि ये ऐक्टिवा 110 नहीं, 125 है। 

इसके अलावा इंस्ट्रुमेंटेशन साफ़ सुथरा और गंभीर लगेगा। स्विच और प्लास्टिक बढ़िया लुक और फ़िनिश वाले लगेंगे। 
और इसमें हौंडा के चिर परिचित फ़ीचर्स तो हैं ही। जैसे कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम, और 190 एमएम का फ़्रंट डिस्क ब्रेक। साथ में डिजिटल मीटर, मेटल बॉडी, ट्यूबलेस टायर वगैरह।

राइड की बात कर लेते हैं, जो इस सेगमेंट में सबसे बेहतरीन में से एक कही जाएगी। ऐक्टिवा 125 अपने सवा सौ सीसी इंजिन, मेटल बॉडी और बनावट के साथ संतुलित राइड देती है। इसकी ताक़त 8.6 बीएचपी की है। कंपनी का दावा ये भी कि ज़्यादा ताक़त के बावजूद इसकी माइलेज सेगमेंट में सबसे बेहतर भी है, जो 59 किमीप्रतिलीटर का मापा गया है।
चुस्त भी लगी और ब्रेकिंग काफ़ी सटीक भी। 

ऐक्टिवा 125 दो वेरिएंट में है, स्टैंडर्ड 52,447 रु में और डीलक्स वेरिएंट 58156 रु में।
अब इस क़ीमत के साथ एक बात तो महसूस की जा सकती है कि जो ऐक्टिवा लेना चाहते हैं, वो इस नए ऐक्टिवा की ओर ज़रूर जा सकते हैं। किफ़ायती है ही, क़ीमत भी ज़्यादा नहीं और राइड के मामले में आरामदेह है ही, साथ में बड़े इंजिन का बोनस भी.

*Ctrl+C और Ctrl+V ना करें । पुरानी छपी हुई है। 

January 01, 2015

मॉडर्न ख़ानाबदोश, जो छुट्टी के बाद वापस नहीं गया...


अपनी भागती दौड़ती ज़िंदगी में से कुछ दिन निकाल कर हम-आप छुट्टी पर जाते हैं, वेकेशन पर जाते हैं, नई नई जगहें देखते हैं, लोगों और परंपराओं से परिचय होता है, और फिर ख़ुश होकर वापस अपनी ज़िंदगी, अपने काम पर वापस आ जाते हैं। दोस्तों की क़िस्से सुनाते हैं, फ़ोटो दिखाते हैं और फिर कुछ दिनों में फिर से वो जोश ठंडा पड़ जाता है। फिर हम अगली छुट्टी के सपने देखने लगते हैं। लेकिन सोचिए अगर हम ऐसी किसी छुट्टी पर निकलें और फिर बिना काम पर वापस आए अगली छुट्टी पर निकलें और फिर अगली। वैसे सोच भी लिया तो हमें ये भी पता होता है कि नौकरी, परिवार और ईएमआई के फेरों के साथ ये फ़िल्मों में हो सकता है असल ज़िंदगी में नहीं। लेकिन एक शख़्स ऐसे हैं जिनकी असल कहानी फ़िल्मी कही जा सकती है। 
नाम है इनका जेन्स जेकब, जर्मनी में पैदा व्यवसायी हैं। इनका सपना था दुनिया देखना, अलग अलग लोगों,  संस्कृतियों और परंपराओं को देखना-महसूस करना। तो उन्होंने इस सपने को सपना नहीं रहने दिया।  
अपनी 1965 मॉडल की फोक्सवागन कॉम्बी कार ली और निकल गए दुनिया घूमने। अपनी इस पचास साल पुरानी सवारी को जेकब प्यार से ब्लूई पुकारते हैं। और ब्लूई को उन्होंने अपनी ज़रूरतों के हिसाब से बदल भी दिया है। इसमें एक छोटी रसोई बनाई है, पानी की टंकी है, टायर और टूल भी। साथ में कुछ किताबें भी।


जन्स जेकब ने अपने लंबे सफ़र को शुरू तो अकेला किया था लेकिन अब उनके साथ उनकी पत्नी सिंथिया भी चल रही हैं। जिनसे वो दुबई में मिले थे। ये जोड़ी अब तक 26 देश घूम चुकी है। 60 हज़ार किलोमीटर से ऊपर का सफ़र। नीदरलैंड, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, तुर्की, दुबई, ओमान, ईरान और फिर भारत भी। 

अब ये जोड़ी भारत घूमने के बाद नेपाल और तिब्बत की योजना बना रही है और सफ़र वहीं नहीं रुकेगा। आगे सफ़र इंडोनेशिया और वियतनाम की ओर रुख़ करने वाला है। 
तो सोचिए आप भी कब निकल रहे हैं ऐसे सफ़र के लिए। 


*पुरानी छपी हुई है। 

December 31, 2014

इमोशनल अपील


आज का वक्त ऐसा आ गया है जब कारों और मोटरसाइकिलें बहुत हद तक एक जैसे हो गए हैं। अगर तकनीकी और आंकड़ों के हिसाब से देखें तो बहुत हद तक मिलते जुलते। जैसे किसी एक सेगमेंट को ले लीजिए, तो वहां पर इंजिन की क्षमता, बीएचपी से लेकर गाड़ी की माइलेज वगैरह एक जैसे ही नज़र आएंगे। अंतर होगा, लेकिन मामूली। ऐसा नहीं जो क्रांतिकारी हो और आपके ख़रीद के फ़ैसले को बदल दे, या फिर यूएसपी बन जाए। कुछेक ही प्रोडक्ट आजकल ऐसे होते हैं जिनके पास ऐसे एक्सक्लूसिव फ़ीचर्स होते हैं और वो फ़ीचर्स भी जल्द बाकी कंपनियां ले आती हैं। ऐसे में हम कोई प्रोडक्ट क्यों ख़रीदते हैं इस फ़ैसले को किसी नंबर और मीटर पर  नापना बहुत आसान या सीधा काम नहीं है। इसमें काफ़ी हद मार्केटिंग और ब्रांडिंग की चाशनी फैली रहती है और बहुत हद तक इन सबके नतीजतन हमारा फ़ैसला इमोशनल भी हो जाता है। अपने आसपास किसी से भी पूछिए तो जड़ में जो वजहें आती हैं वो कई बार आती हैं जिसे क़ीमत या बीएचपी में समझना मुश्किल है। बहुत हद तक फ़ैसला आ जाता है उसी प्वाइंट पर कि कार को देख कर हम कैसा महसूस कर रहे हैं, गाड़ी के साथ क्या महसूस कर रहे हैं। तो वही बात कि सवारियों की ख़रीदारी में जहां समझदारी का रोल होता है बहुत सा हिस्सा उसकी अपील से जुड़ा भी होता है। ख़ैर ये सब मैं सोच रहा था जब ऑडी की एक कार चलाने का हाल में मौक़ा आया था। और ये सोच इसलिए आ रही थी, क्योंकि मैं सोच रहा था कि इसे चलाने की मुझे ज़्यादा इच्छा क्यों नहीं हई थी अब तक। और इसके पीछे कोई ठोस लॉजिक वाली वजह नहीं थी। ऑडी की टीटी कूपे। दो दरवाज़ों वाली छोटी स्पोर्टी कार जो मुख्य तौर पर स्पोर्टी छोटी कार के तौर पर आती है। हाल में इसके नए किट यानि एस लाइन कही जाने वाले किट की वजह से ऑडी चाहती थी कि मैं इसे चला कर देखूं कि कैसा है ये नया पैकेज। और ये भी समझूं कि कैसा प्रदर्शन होता है इसका। कितनी रोमांचक है ये कार। ऑडी टीटी को अगर देखें पहली नज़र में बहुत अलग सी कार लगेगी, छोटी स्पोर्ट्स कार तो लगेगी ही, क्योंकि है तो टू सीटर ही, पीछे दो सीटें को बस ख़ानापूर्ती के लिए ही हैं। इस छोटे आकार के साथ जो चीज़ सबसे पहले आपके ज़ेहन में जाएगी वो है इसकी बनावट, इसका लाइन। ये किसी भी एंगिल से शार्प या तीखी बनावट वाली कार नहीं लगेगी। हेडलैंप से लेकर टेललैंप तक, छत से लेकर बंपर तक, सबकुछ गोलाई लिए है। जो मेरे पसंद का नहीं है, हालांकि ढेरों कार प्रेमी हैं जिन्हें ये पसंद है डिज़ाइन। ख़ैर। कार को मैंने चलाना शुरु किया और इसको इंजिन की ताक़त औऱ हैंडलिंग ने समां तो बांधा। तेज़ और हल्की कार, बढ़िया हैंडलिंग और ठोस सस्पेंशन से लैस। जितना इसे चलाता गया, उतनी रोमांचक ये कार लगती गई। इसका छोटा आकार औऱ इसका 211 हॉर्सपावर की ताक़त मुझे मज़ेदार लग रही थी।  इसका इंजिन 1984 सीसी की था। तो पैकेज शानदार लग रही थी। और चूंकि ये ऑडी टीटी कूपे का एस लाइन वर्ज़न था तो अंदर ज़्यादा शाही था, सीटें ज़्यादा आरामदेह। कुल मिलाकर ड्राइव का अनुभव अच्छा हुआ और रोमांचक लगा। तो फिर सोचा कि इसका लुक मुझे ज़्यादा पसंद नहीं था शायद इसलिए अपील नहीं करती थी ये कार पहले। लेकिन आजके प्रदर्शन से तो अच्छी ही लग रही थी। और फिर दिल के बाद बारी आई एक दिमाग़ी एंगिल की। वो है इसकी क़ीमत लगभग 56 लाख रु। औऱ फिर बिंदू वहीं जाकर विश्राम करने चली गई। अगर आपको ये कार दिल से अच्छी है तभी लेंगे आप, नहीं तो इस बजट में कई और तरीके के विकल्प मौजूद हैं।

*पुरानी छपी हुई है। 

December 29, 2014

असली बाइकर नक़ली बाइकर

बार बार उन्हें बाइकर बुलाया जाता है तो बुरा लगता है। असल बाइकर ऐसे थोड़े ही ना होते हैं। बहुतों को जानता हूं, जो दिल से और जीने के तरीके में बाइकर हैं। ख़ुद मैं भी उनमें से हूं जो ये मानते हैं कि बाइक पर लंबी राइड जीवन के लगभग हर तरीके की परेशानी को दूर कर देती है। और ऐसे में जब बिना हेलमेट के, सैकड़ों के झुंड में देर रात सड़कों पर, लोगों को परेशान करते हुए, बाइक भगाते नौजवानों को देखता हूं तो फिर बुरा लगता है। उन्हें देखकर ये नहीं लगता है कि वो इस सवारी का मज़ा लेने के लिए निकले हैं। साफ़ लगता है कि वो भड़ास निकालने के लिए निकले हैं सड़कों पर। उनके सामने पुलिस वालों को भी एक तरीके से बेबस देखता हूं। एक जिप्सी में दो पुलिस वालों के सामने से एक साथ 50 मोटरसाइकिलें निकलें तो फिर किसी को भी संभालना मुश्किल लगेगा ही। और कौन उनसे उलझे वाले भाव से वो दूसरी ओर देखने लगते हैं। कौन उन्हें हेलमेट के लिए पूछे और कौन रेडलाइट जंप करने पर सवाल करे। और ऐसे में नतीजा ये होता है कि बाइकसवार हुड़दंग मचाते चलते हैं और जो लोग उनके रास्ते में आते हैं परेशान होते रहते हैं। और सबसे ज़्यादा ये हुड़दंग देखने को मिलता है किसी ना किसी त्यौहार के दौरान। जहां पर मानो लाइसेंस मिल जाता है सब बाइकसवारों को कुछ ना कुछ स्टंट करने का। और जब तक पुलिस वालों पर नहीं पड़ती वो उन्हें घेरते भी नहीं। पहले तो पुलिस नज़रअंदाज़ करती रही, फिर टीवी चैनलों पर लगातार विज़ुअल दिखाने पर दबाव बढ़ा और फिर पुलिस ने कार्रवाई करनी शुरू की। और पिछली बार तो हद ही हो गई, जब एक बाइकसवार की पुलिस की गोली से मौत ही हो गई। कुछ वक्त पहले घटना सामने आई है जहां पर पुलिस वालों ने लगभग 400 बाइकसवारों को पकड़ा, 250 मोटरसाइकिलों को ज़ब्त किया। इसकी भी तस्वीर काफ़ी अजीबोगरीब थी, पुलिसवालों को ऐसे डंडे बरसाते देखा गया कि समझ नहीं आ रहा था कि पुलिस करना क्या चाहती है इनके साथ। लाठी के चोट लिए नौजवान भी बिलबिलाते दिखे। ख़ैर, इस सबके बाद इन सभी नौजवानों की काउंसेलिंग भी करवाई गई। दिल्ली पुलिस ने तमाम धर्मगुरूओं को बुला कर इन नौजवानों को समझाने के लिए कहा। उन्होंने अपने अपने संदेश दिए। बाद में इनके मां-बाप को बुलाया गया, उनसे बात की गई और कहा गया कि अपने बच्चों को सिखाएं संभालें। इन क़दमों से लगा कि पुलिस कुछ तो रास्ते पर है इस समस्या से निपटने में। लेकिन अनुशासन एक बार में तो बनता नहीं है। रोज़ रोज़ की आदत ही अनुशासन में बदलेगी । तो पहले तो पुलिस को नियमों के पालन के लिए ज़ोर लगाने की ज़रूरत है, जिससे नियमों को तोड़ना किसी को भी आसान ना लगे। एनफ़ोर्समेंट की कमी नियम-क़ानून को बेमानी बना देते हैं। और हर बार बाइकसवारों को हुड़दंग के बाद यही देखने को मिलता है। दूसरे पुलिस को इन नौजवानों से निपटने के लिए इनसे बात करनी होगी, केवल कड़ाई से तो ये उम्र रुकने वाली होती नहीं है। ऐसे में ज़रूरत है कि उनसे पुलिस किसी ना किसी तरीके से एक संवाद भी बनाए, उनसे बात करे और समझाए कि केवल नियम के लिए नहीं अपनी जान की सुरक्षा के लिए भी सेफ़्टी ज़रूरी है। और ये भी कि असल बाइकर अपनी बाइक से प्यार तो करते ही हैं, बाकी सवारों की इज़्ज़त भी करते हैं।

*पहले छपी हुई है। 

December 27, 2014

टोयोटा कोरोला ऑल्टिस


दुनिया में सबसे ज़्यादा बिकने वाली सेडान कार टोयोटा कोरोला ऑल्टिस अपने ग्यारवहें जेनरेशन में। और इसमें बदलाव बाहर से लेकर अंदर तक देखने को मिल सकता है। सबसे पहले जो चीज़ आपको इसमें नई दिखेगी वो बाहर ही दिखेगी। कंपनी ने 
ऑल्टिस के चेहरे मोहरे को बदला है। जिसमें बड़ी भूमिका है इसके नए फ़्रंट ग्रिल को नया देखेंगे, साथ में एलईडी लाइट्स भी नए हैं। इसके अलावा आप देख सकते हैं इसके 16 इंच के अलॉय और क्रोम से चमकता ये पैकेज। 

कार के अंदर भी इसे आप ज़्यादा प्रीमियम होते देख सकते हैं। जहां पर कार्बन पियानो ब्लैक से ये आकर्शक लगेगी, स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल। डोर हैंडिल के भीतर क्रोम है।  कार के व्हीलबेस को 100 एमएम बढ़ाया गया है।  वहीं आराम के लिए कुछ फ़ीचर्स का ज़िक्र करना ज़रूरी है। जहां पर इसमें लगे हैं रेन सेसंर, वहीं 7 इंच एलसीडी स्क्रीन के साथ नैविगेशन जिसमें यूएसबी और ब्लूटूथ की कनेक्टिविटी है और इसमें ऑडियो भी है। 

पिछली सीट पर आराम के लिए कुछ ख़ास नयापन है। पिछली सीट को रिक्लाइन करने की सुविधा है, जो इस सेगमेंट में नहीं देखने को मिलता है। साथ में पिछली सीट पर लेगरूम भी बढ़ाया गया है। पिछली सीट पर रीडिंग लाइट, सनशेड और पावर सॉकेट दिया गया है। समझ सकते हैं कि इस सेगमेंट में कहानी पिछली सीट पर ही हिट होती है,क्योंकि ऐसी कारों के ग्राहक पीछे ही बैठते हैं। तो वहां पर ज़्यादा आराम और फ़ीचर्स के साथ इसे आकर्षक पैकेज बनाने की कोशिश की है। 
पेट्रोल वर्ज़न वाली कोरोला ऑल्टिस में लगा है 1.8 लीटर वीवीटीआई इंजिन। इसमें एक सीवीटीआई और एक मैन्युअल वर्ज़न का विकल्प है। वहीं इसमें से एक विकल्प है 1.4 लीटर डी4डी इंजिन भी। 

वहीं सुरक्शा के लिए इसमें रियर कैमरा लगा है, डिस्प्ले ऑडियो स्क्रीन के साथ
और बाक़ी के फ़ीचर्स है वो जो आमतौर पर इस सेगमेंट की कारों में होते हैं, जैसे ब्रेक असिस्ट ईबीडी और एबीएस के साथ। और साथ इमोबलाइज़र भी। 

आख़िर में इसकी क़ीमत आपको बता देते हैं। यहां पर पेट्रोल कोरोला की एक्सशोरूम क़ीमत शुरू हो रही है 11.99 लाख रु से और जाती है 16.89 लाख रु तक।   वहीं डीज़ल वर्ज़न की एक्सशोरूम क़ीमत 13.07 से 16.68 लाख रु के बीच है। 


*पुरानी छपी हुई है।