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January 07, 2015

Vespa S


स्कूटरों का बोलबाला देख कर दिल ख़ुश हो जाता है आजकल। भले ही एक से एक तेज़ तर्रार मोटरसाइकिलों ने हिंदुस्तानी सड़कों पर धूम मचा रखी हो, भले ही माचो और तेज़ तर्रार फ़ील के साथ आने वाली बाइक्स ने यंगस्टर्स को दीवाना बना रखा है लेकिन उन सब के बावजूद देसी सड़कों को सबसे ज़्यादा रंगीन अगर किन्हीं सवारियों ने बना रखा है तो वो हैं स्कूटर। चारों ओर से रंग-बिरंगे स्कूटर दौड़ते भागते नज़र आ जाते हैं और लगता है कि ये अलग क़ौम तैयार हो चुकी है।  स्कूटर प्रेमियों और स्कूटर सवारों की। छोटे-मझोले स्कूटर, रंग-बिरंगे डिज़ाइन वाले स्कूटर। और उन्हें चलाने वाले भी एक तसल्ली वाले मूड में नज़र आते हैं, जो केवल ज़रूरत के लिए स्कूटर नही चुन रहे, कहीं ना कहीं वो मोटरसाइकिल छोड़कर एक नया चुनाव कर रहे हैं। और इसी क़ौम को थोड़ा और रंगीन कर रही है जानी पहचानी वेस्पा।


 कंपनी जिसने भारत में स्कूटर को लाइफ़स्टाइल सेगमेंट में ले जाने के लिए कमर कसा हुआ है। वो एक के बाद एक स्कूटर लेकर आ रही है जो शौकीनों के लिए ख़ास सवारी कही जाएगी। हाल ही में कंपनी ने एक और प्रोडक्ट लौंच किया जिसका नाम है वेस्पा एस। ये हाल में जो वेस्पा स्कूटर लौंच हुए हैं, उनसे बिल्कुल अलग है। कंपनी ने पहले तो वेस्पा १२५ उतारी थी एलएक्स और वीएक्स अवतार में । लुक और फ़ील के हिसाब से ये पारंपरिक वेस्पा लग रही थी और साथ में हाल फ़िलहाल में स्कूटरों में जो डिज़ाइन चल रहे हैं उसी लीक पर डिज़ाइन की हुई सवारी थी। 

लेकिन वेस्पा एस के साथ कंपनी ने थोड़ा अलग करने की कोशिश की है। इसका लुक मौजूदा दोनों स्कूटरों से बिल्कुल अलग है। जिसमें सबसे ख़ास दो चीज़ें लग रही हैं एक तो इसमें इस्तेमाल हुआ क्रोम और इसका चौकोर हेडलैंप। अब एक हेडलैंप किसी भी गाड़ी या सवारी का लुक किस हद तक बदल सकता है ये समझने के लिए वेस्पा एस को देखना ज़रूरी है। इस हेडलैंप के साथ स्कूटर पुराने ज़माने का नया पैकेज लगता है। एक बहुत अलग तरीके का स्टाइल स्टेटमेंट देने वाला स्कूटर। स्पोर्टी भी और रेट्रो भी। कुछ ख़ास तरह के स्कूटरप्रेमियों की इसमें दिलचस्पी हो सकती है।

 इसमें भी लगा है १२५ सीसी का इंजिन और इसकी ताक़त ठीक ठाक १० बीएचपी के लगभग है। यहां पर इसकी राइड का ज़िक्र करें तो ये सटीक और सिंपल तरीके से भागती है। स्कूटरों से जैसी ताक़त की उम्मीद होती है ये पूरा करता है और हैंडलिंग में ख़ुश करता है। अच्छी संतुलित राइड। ब्रेकिंग भी अच्छी है। इन सब मामलों में जो मौजूदा स्कूटर हैं उन्हें अच्छी टक्कर देती है ये सवारी। लेकिन इसका सेगमेंट वो नहीं, ये तो शौकीनों की चीज़ हैं। दिल्ली में लगभग ७५ हज़ार रु की एक्सशोरूम क़ीमत का यही तो मतलब है। और ऊपर से चार चटख़ रंग में । तो इसकी क़ीमत और लुक इसे चुनिंदा ग्राहकों की फेवरेट बनाएंगे। देखते हैं बिक्री कैसी होती है। लेकिन ये तय है कि स्कूटरों में भी एक लाइफ़स्टइल सेगमेंट फल फूल रहा है। 

*पुरानी छपी हुई है। 

January 03, 2015

हौंडा ऐक्टिवा 125

हौंडा टू व्हीलर्स ने एक नई सवारी पेश की थी दुपहिया बाज़ार में, ये अहम लौंच है या नहीं, इसके बारे में तो बाद में ही पता चलेगा। लेकिन सवारी को चलाना तो ज़रूरी था, ये समझने के लिए कि बेस्टसेलर को और बेहतर कैसे किया जा सकता है। जिस एक्टिवा को सालों से हमने स्कूटर बाज़ार पर राज करते देखा है, यही नहीं, हाल के वक्त में बेस्टसेलर मोटरसाइकिलों को भी पछाड़ दिया। 
तो पहली बार बल्कि हौंडा टू व्हीलर्स ने 125 सीसी का स्कूटर उतारा है। और स्कूटर को देखें तो इसमें अलग से ज़िक्र है इसके इंजिन का। इसका नाम ही दिया गया है, ऐक्टिवा 125। जिसे चलाने के लिए निकला दिल्ली की गर्म सुबह में। मौसम ने तो कहानी थोड़ी गड़बड़ कर दी थी लेकिन फिर भी इतनी दूरी चला ही लिया कि इस नए पैकेज की शुरूआती राइड के बारे मे जानकारी दी जा सके। 

पहले लुक के बारे में बताएं तो बहुत ज़्यादा फ़र्क नहीं लगेगा आपको मौजूदा ऐक्टिवा और नए ऐक्टिवा में। लेकिन नज़दीक जाएं तो इसके अगले हिस्से में लगे क्रोम से लगेगा कि कुछ अलग और नया है। फिर किनारे से देखें तो पता चल जाएगा कि ये ऐक्टिवा 110 नहीं, 125 है। 

इसके अलावा इंस्ट्रुमेंटेशन साफ़ सुथरा और गंभीर लगेगा। स्विच और प्लास्टिक बढ़िया लुक और फ़िनिश वाले लगेंगे। 
और इसमें हौंडा के चिर परिचित फ़ीचर्स तो हैं ही। जैसे कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम, और 190 एमएम का फ़्रंट डिस्क ब्रेक। साथ में डिजिटल मीटर, मेटल बॉडी, ट्यूबलेस टायर वगैरह।

राइड की बात कर लेते हैं, जो इस सेगमेंट में सबसे बेहतरीन में से एक कही जाएगी। ऐक्टिवा 125 अपने सवा सौ सीसी इंजिन, मेटल बॉडी और बनावट के साथ संतुलित राइड देती है। इसकी ताक़त 8.6 बीएचपी की है। कंपनी का दावा ये भी कि ज़्यादा ताक़त के बावजूद इसकी माइलेज सेगमेंट में सबसे बेहतर भी है, जो 59 किमीप्रतिलीटर का मापा गया है।
चुस्त भी लगी और ब्रेकिंग काफ़ी सटीक भी। 

ऐक्टिवा 125 दो वेरिएंट में है, स्टैंडर्ड 52,447 रु में और डीलक्स वेरिएंट 58156 रु में।
अब इस क़ीमत के साथ एक बात तो महसूस की जा सकती है कि जो ऐक्टिवा लेना चाहते हैं, वो इस नए ऐक्टिवा की ओर ज़रूर जा सकते हैं। किफ़ायती है ही, क़ीमत भी ज़्यादा नहीं और राइड के मामले में आरामदेह है ही, साथ में बड़े इंजिन का बोनस भी.

*Ctrl+C और Ctrl+V ना करें । पुरानी छपी हुई है। 

December 06, 2011

स्कूटरनामा



हर बारिश के मौसम में मेरी दोस्ती होती थी विजय से। वो मौसम, जिसमें एशिया की सबसे बड़ी कॉलनी कहे जाने वाले पटना के बहुगर्वित कंकड़बाग कॉलनी का ट्रांसफ़ॉर्मेशन होता था, एशिया की सबसे बड़ी कॉलनी से इंसान के रिहाइश वाली झील मे। और इसी मौसम में अशोक नगर में रहने वाले मेरे चाचाजी विजय को हमारे घर छोड़ जाते थे। सड़क पर जमा पानी में ना चल पाना उसका नखरा नहीं, उसकी मेकैनिकल मजबूरी थी। क्योंकि विजय का पूरा नाम था विजय सुपर। 80 के दशक का स्कूटर। जीहां शुरूआत थोड़ा नाटकीय रखा  है मैंने आज, क्योंकि स्कूटरों की कहानी मुझे थोड़ी नाटकीय लगती है। स्कूटर चल रही है या चल रहा है इस दुविधा में मैंने लगभग एक दशक निकाल दिया है। बिहार प्रदेश का होने की वजह से मुझे शंका तो हमेशा रही हालांकि पुकारा हमेशा पुल्लिंग ही है। लेकिन तीस-चालीस पहले जाएं और पुरानी वेस्पा स्कूटर को देखें तो वो ऑटोमैटिकली ख़ूबसूरत और कमनीय लगेगी, लगेगा नहीं। हालांकि भारत में प्रिया या बजाज सुपर तक तो वो नैन-नक्श बचे थे लेकिन लैंब्रेटा, विजय सुपर और बजाज चेतक ने स्कूटर को पूरा मेल डोमेन में डाल दिया था। एक ट्रांसफ़ोर्मेशन पूरा हुआ।
1972 में भारत सरकार ने लैंब्रेटा की फ़ैक्ट्री और ब्रांड ख़रीद कर जब भारत में स्कूटरों का नया युग शुरू किया था, स्कूटर इंडिया लिमिटेड के नाम से। तब वजह तो एक ही थी, सस्ता ट्रांसपोर्टेशन। जो कार नहीं ख़रीद सकते थे वो स्कूटर ले लें। गरीबी और बुनियादी ढांचे की कमी झेल रहे देश में ऐसी सवारी की तो ज़रूरत थी ही। इसी कंपनी ने विजय सुपर भी बनाया और एक पूरी पीढ़ी को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाया। उसी दौरान एक और कंपनी लगी हुई थी ऐसे ही ट्रांसपोर्टेशन में । बजाज जिसकी कहानी शुरू हुई थी वेस्पा स्कूटरों को भारत में बेचने से। और इसी कंपनी ने सबसे लंबे वक्त तक स्कूटर के झंडे को उठाए रखा था भारत में। बजाज चेतक, सुपर, प्रिया, क्लासिक वगैरह। और बजाज को हमारा बजाज बनाने वाला चेतक, जो देश में स्कूटरों का पोस्टरब्वॉय था, उसका सफ़र भी बड़े नाटकीय ढंग से ख़त्म हुआ। बेटे राजीव बजाज ने कहा कि नहीं बनाएंगे अब पिता ने कहा कि हां बनाएंगे। वो कहानी भी ख़त्म हुई।
मुझे वो वक्त तो याद है जब हीरो हौंडा की एंट्री हुई थी। जब सीडी 100 आई थी, जो मुझे येज़डी और बुलेट की भीड़ में अजीब सी सवारी लगती थी। लेकिन उस वक्त नहीं पता था कि यही बाइक कहानी ख़त्म करेगी स्कूटरों की भारत में। हीरो हौंडा ने जिस तरीके से भारत का मोटरसाइकिलीकरण किया, वो आज तक जारी रहा है। लेकिन एक और विडंबना ये है कि जिस हौंडा ने भारत में स्कूटरों को ख़त्म किया, वही उसे वापस लाई भी। जब एलएमएल वेस्पा से लेकर बजाज ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे वहीं हौंडा मोटरसाइकिल्स एंड स्कूटर्स ने भारत में स्कूटरों में अपना भविष्य देखा। फ़ोर स्ट्रोक और बिना गियर की ऐक्टिवा आज देश के लगभग सभी शहरों में दिखेगी, और ग्राहक इसके लिए तीन-चार महीने इंतज़ार भी कर रहे हैं। और इसी के साथ शुरू हो चुका है स्कूटर का यू-टर्न।
वैसे स्कूटरों की बात अधूरी रहेगी अगर काइनेटिक हौंडा का ज़िक्र ना हो। यंगस्टर्स के बीच जो पुकारी जाती थी काईनी। बिना गियर की काईनेटिक हौंडा इतनी हिट हुई थी, हालांकि तबके स्कूटरों के मुक़ाबले उसकी हल्की बॉडी का हमेशा मज़ाक होता था। मेरे एक मित्र की फेवरेट कहानी है कि वो और उनके पिताजी, पुरानी लैंब्रेटा से जा रहे थे और सामने से एक काइनेटिक हौंडा आ गई...दोनों की कमर लड़ी, काइनेटिक पलट गई लेकिन लैंब्रेटा मस्त चाल में चलती रही। उसकी चाल में कोई फर्क नहीं आया। लेकिन उस किस्से को अब बहुत दिन हो गया है...

*Published