कंपनी ने यही किया भी है। तो इन नई जानकारियों के बाद पुरानी जानकारी दे देते हैं इस मोटरसाइकिल के बारे में । इसमें लगा है 249 सीसी की V Twin ऑयल कूल्ड इंजिन। इसकी ताक़त है 28 बीएचपी की और इसका टॉर्क है 22 एनएम का। 5 स्पीड ट्रांसमिशन है और इसकी टॉप स्पीड जाती है 140 किमी प्रति घंटे की।
January 09, 2015
DSK Hyosung GT250 R
January 07, 2015
Vespa S
कंपनी जिसने भारत में स्कूटर को लाइफ़स्टाइल सेगमेंट में ले जाने के लिए कमर कसा हुआ है। वो एक के बाद एक स्कूटर लेकर आ रही है जो शौकीनों के लिए ख़ास सवारी कही जाएगी। हाल ही में कंपनी ने एक और प्रोडक्ट लौंच किया जिसका नाम है वेस्पा एस। ये हाल में जो वेस्पा स्कूटर लौंच हुए हैं, उनसे बिल्कुल अलग है। कंपनी ने पहले तो वेस्पा १२५ उतारी थी एलएक्स और वीएक्स अवतार में । लुक और फ़ील के हिसाब से ये पारंपरिक वेस्पा लग रही थी और साथ में हाल फ़िलहाल में स्कूटरों में जो डिज़ाइन चल रहे हैं उसी लीक पर डिज़ाइन की हुई सवारी थी।
लेकिन वेस्पा एस के साथ कंपनी ने थोड़ा अलग करने की कोशिश की है। इसका लुक मौजूदा दोनों स्कूटरों से बिल्कुल अलग है। जिसमें सबसे ख़ास दो चीज़ें लग रही हैं एक तो इसमें इस्तेमाल हुआ क्रोम और इसका चौकोर हेडलैंप। अब एक हेडलैंप किसी भी गाड़ी या सवारी का लुक किस हद तक बदल सकता है ये समझने के लिए वेस्पा एस को देखना ज़रूरी है। इस हेडलैंप के साथ स्कूटर पुराने ज़माने का नया पैकेज लगता है। एक बहुत अलग तरीके का स्टाइल स्टेटमेंट देने वाला स्कूटर। स्पोर्टी भी और रेट्रो भी। कुछ ख़ास तरह के स्कूटरप्रेमियों की इसमें दिलचस्पी हो सकती है।
इसमें भी लगा है १२५ सीसी का इंजिन और इसकी ताक़त ठीक ठाक १० बीएचपी के लगभग है। यहां पर इसकी राइड का ज़िक्र करें तो ये सटीक और सिंपल तरीके से भागती है। स्कूटरों से जैसी ताक़त की उम्मीद होती है ये पूरा करता है और हैंडलिंग में ख़ुश करता है। अच्छी संतुलित राइड। ब्रेकिंग भी अच्छी है। इन सब मामलों में जो मौजूदा स्कूटर हैं उन्हें अच्छी टक्कर देती है ये सवारी। लेकिन इसका सेगमेंट वो नहीं, ये तो शौकीनों की चीज़ हैं। दिल्ली में लगभग ७५ हज़ार रु की एक्सशोरूम क़ीमत का यही तो मतलब है। और ऊपर से चार चटख़ रंग में । तो इसकी क़ीमत और लुक इसे चुनिंदा ग्राहकों की फेवरेट बनाएंगे। देखते हैं बिक्री कैसी होती है। लेकिन ये तय है कि स्कूटरों में भी एक लाइफ़स्टइल सेगमेंट फल फूल रहा है।
*पुरानी छपी हुई है।
January 05, 2015
रिनॉ क्विड जब चलाई मैंने...
आमतौर पर कभी ऐसा नहीं होता है। होने की संभावना भी कम है। कारों की दुनिया में घूमते टहलते इतने साल हो चुके हैं लेकिन इतने सालों में कभी भी नहीं देखा कि कौंसेप्ट कार जो वाकई कौंसेप्ट कार हैं वो ऐसे सामने आएं, हमारे हाथ लगें और उन्हें चलाने का मौक़ा भी मिले। कौंसेप्ट कारें आम तौर पर कंपनियों का विज़न डॉक्यूमेंट होती हैं, कार डिज़ाइनरों की क्रिएटिविटी का एक कोलाज होता है। जिनमें बहुत सी कल्पनाओं और अंदाज़े की भविष्यवाणियां होती हैं। यानि वो गाड़ियां जो आने वाले दिनों की कारों और उनके फ़ीचर्स की बात करें, अंदाज़ा लगाएं और उनको एक कार में समेट कर लाए। यही वजह है कि ज़्यादातर कार जो कौंसेप्ट अवतार में हमारे सामने आती हैं वो चलने की हालत में नहीं होती हैं। हालांकि कई बार कार कंपनियां थोड़ी चालाक़ी दिखाती हैं और उन कारों को कौंसेप्ट के तौर पर ले आती हैं जो दरअसल प्रोडक्शन में उतरने को तैयार होती हैं लेकिन कंपनी अपने कांपिटिशन को बताना नहीं चाहती हैं कि वो इस कार को जल्द लौंच करने वाली है । लेकिन वो अपवाद हैं। उनका ज़िक्र ऐसे ही कर दिया। दरअसल ये सब भूमिका इसलिए क्योंकि मैं आपको बताना चाहता हूं कि पहली बार मेैंने एक कौंसेप्ट कार चलाई । वो जो वाकई कौंसेप्ट कार है। रिनॉ की क्विड। ये कब आएगी बाज़ार में, आएगी भी कि नहीं ये पता नहीं। वो कार जिसे आप देखें तो पहली नज़र में ही लगेगा कि ये कोई फ़िल्मी स्पेस शिप है या बच्चों की कोई खिलौना कार है जो अचानक किसी तरीके से बड़ी हो गई है। अंदर से देखेंगे तो लगेगा कि किसी टाइम मशीन में चले गए हैं जिसमें बैठ कर किसी भी युग में जा सकते हैं। और रिनॉ ने इसे दिल्ली के ऑटो एक्स्पो में दर्शकों के सामने पेश किया था। और उसके बाद मुझे वाकई पता नहीं था कि इसे चलाने का मौक़ा मिलने वाला है।
दरअसल रिनॉ कार कंपनी की भारत एंट्री कोई धमाकेदार नहीं रही है, महिंद्रा के गठजोड़ और लोगन के ख़ात्मे के बाद भी कंपनी अपनी कारों के साथ कोई बहुत बड़ा धमाका नहीं कर पाई थी। लेकिन वो सभी समीकरण बदल गए। जब कंपनी ने अपनी डस्टर एसयूवी सवा सात लाख रू में लौंच कर दी। इस एसयूवी ने भारत में रिनॉ को स्थापित कर दिया है। अभी भी कार बिक रही है। और इस फ्रेंच कार कंपनी के लिए अचानक भारत की अहमियत काफ़ी बढ़ गई है। कंपनी की और भी कारें हैं भारत में, कई आने वाली भी हैं। कंपनी इसी सिलसिले में लंबा गेम खेलने की तैयारी में है। नहीं तो यूरोप के बाहर पहली बार अपनी कौंसेप्ट कार को लाना, दिल्ली ऑटो एक्स्पो में और ऊपर से भारतीय पत्रकार को इसे चलाने देने का मतलब यही है कि कंपनी इस देश में पैठ बनाना चाहती है। सभी को बताना चाहती है कि वो यहां आ चुकी है और भारत को लेकर गंभीर है। जिसके लिए उन्होंने चुनी है वो क्विड जिसे डिज़ाइन करने में कई भारतीय पहलू शामिल किए गए। भारतीय डिज़ाइनर ने इसके डिज़ाइन में शिरकत की, भारतीय रंग को शामिल किया।
यही सब सोचते हुए मैं क्विड में बैठा। छोटी एसयूवी नुमा गाड़ी। कैसे भी मुश्किल रास्तों पर चलने का दावा करते चौड़े, बड़े टायर। फ़्यूचरिस्टिक चेहरा-मोहरा और आंखें। गाड़ी में ग्रे और पीले रंग का दिलचस्प मेल दिखा। चटख़ रंगरोगन। वहीं कार का दरवाज़ा जो पंख की तरह, ऊपर की ओर खुलता है, वो अंदर की अनोखी दुनिया में ले जाता है। सीटों की दो क़तारें। लेकिन दिलचस्प बात ये कि ड्राइवर सीट बीच में। उसके दोनों तरफ़ एक एक सीटें चिपकी थीं। यानि यार-दोस्त या फ़ैमिली एक साथ झुंड में जाने का अहसास होता है। मानो दोस्त लोग कंधों में हाथ टिकाए चले जा रहे हैं । इसके पीछे भी सीट की एक क़तार है। तो ड्राइवर को कार के बीचोबीच एक स्टीयरिंग व्हील मिलता है, जो किसी रेस कार या प्लेन का छवि देता है। दो तीन नॉब जो कार को स्टार्ट या बंद करने के लिए थे। गियर बदलने के लिए थे । साथ में बाईं तरफ़ एक छोटा स्क्रीन जिसकी भूमिका काफ़ी दिलचस्प थी। वो फ़्लाइंग कंपैनियन यानि उड़न दोस्त का भेजा वीडियो दिखाता है। दरअसल इस कार की छत पर एक छोटू हेलिकॉप्टर को फ़िट किया गया है। तकनीकी तौर पर वो एक क्वॉडकॉप्टर है, कैमरे के साथ । जिसे उड़ा दीजिए और आगे के ट्रैफिक से लेकर अनजान रास्तों को पढ़ कर आपको वीडियो भेज देगा। ये सबसे ज़बर्दस्त फ़ीचर लगा हमें कौंसेप्ट का लेकिन बदकिस्मती से वो आज हमारे सामने नहीं आया था।
तो फिर हमने इस कार को चलाया भी। इकलौती कार हो तो संभाल कर चलाना लाज़िमी था। चूंकि कौंसेप्ट कार है इसलिए इसे सिर्फ़ चलने लायक बनाया गया है। तो ऐसा नहीं था कि बहुत धांसू ़ड्राइव हो, बहुत धीमी और थोड़ी दूरी की ड्राइव रही। लेकिन कौंसेप्ट कार होने की वजह ये यही काफ़ी थी। वैसे भी कार के अंदर की आवाज़, इसकी चाल और रफ़्तार सब बता रही थी कि ये एक कौंसेप्ट कार है। कार के अलग अलग हिस्से से आने वाली आवाज़ें बता रही थीं कि किसी भी कार को तैयार करने से पहले हरेक हिस्से की कुछ ना कुछ कहानी होती है, शायद वही बताने की कोशिश कर रही थी कार मुझे।
January 03, 2015
हौंडा ऐक्टिवा 125
हौंडा टू व्हीलर्स ने एक नई सवारी पेश की थी दुपहिया बाज़ार में, ये अहम लौंच है या नहीं, इसके बारे में तो बाद में ही पता चलेगा। लेकिन सवारी को चलाना तो ज़रूरी था, ये समझने के लिए कि बेस्टसेलर को और बेहतर कैसे किया जा सकता है। जिस एक्टिवा को सालों से हमने स्कूटर बाज़ार पर राज करते देखा है, यही नहीं, हाल के वक्त में बेस्टसेलर मोटरसाइकिलों को भी पछाड़ दिया।
तो पहली बार बल्कि हौंडा टू व्हीलर्स ने 125 सीसी का स्कूटर उतारा है। और स्कूटर को देखें तो इसमें अलग से ज़िक्र है इसके इंजिन का। इसका नाम ही दिया गया है, ऐक्टिवा 125। जिसे चलाने के लिए निकला दिल्ली की गर्म सुबह में। मौसम ने तो कहानी थोड़ी गड़बड़ कर दी थी लेकिन फिर भी इतनी दूरी चला ही लिया कि इस नए पैकेज की शुरूआती राइड के बारे मे जानकारी दी जा सके।
पहले लुक के बारे में बताएं तो बहुत ज़्यादा फ़र्क नहीं लगेगा आपको मौजूदा ऐक्टिवा और नए ऐक्टिवा में। लेकिन नज़दीक जाएं तो इसके अगले हिस्से में लगे क्रोम से लगेगा कि कुछ अलग और नया है। फिर किनारे से देखें तो पता चल जाएगा कि ये ऐक्टिवा 110 नहीं, 125 है।
इसके अलावा इंस्ट्रुमेंटेशन साफ़ सुथरा और गंभीर लगेगा। स्विच और प्लास्टिक बढ़िया लुक और फ़िनिश वाले लगेंगे।
और इसमें हौंडा के चिर परिचित फ़ीचर्स तो हैं ही। जैसे कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम, और 190 एमएम का फ़्रंट डिस्क ब्रेक। साथ में डिजिटल मीटर, मेटल बॉडी, ट्यूबलेस टायर वगैरह।
राइड की बात कर लेते हैं, जो इस सेगमेंट में सबसे बेहतरीन में से एक कही जाएगी। ऐक्टिवा 125 अपने सवा सौ सीसी इंजिन, मेटल बॉडी और बनावट के साथ संतुलित राइड देती है। इसकी ताक़त 8.6 बीएचपी की है। कंपनी का दावा ये भी कि ज़्यादा ताक़त के बावजूद इसकी माइलेज सेगमेंट में सबसे बेहतर भी है, जो 59 किमीप्रतिलीटर का मापा गया है।
चुस्त भी लगी और ब्रेकिंग काफ़ी सटीक भी।
ऐक्टिवा 125 दो वेरिएंट में है, स्टैंडर्ड 52,447 रु में और डीलक्स वेरिएंट 58156 रु में।
अब इस क़ीमत के साथ एक बात तो महसूस की जा सकती है कि जो ऐक्टिवा लेना चाहते हैं, वो इस नए ऐक्टिवा की ओर ज़रूर जा सकते हैं। किफ़ायती है ही, क़ीमत भी ज़्यादा नहीं और राइड के मामले में आरामदेह है ही, साथ में बड़े इंजिन का बोनस भी.
January 01, 2015
मॉडर्न ख़ानाबदोश, जो छुट्टी के बाद वापस नहीं गया...
अपनी भागती दौड़ती ज़िंदगी में से कुछ दिन निकाल कर हम-आप छुट्टी पर जाते हैं, वेकेशन पर जाते हैं, नई नई जगहें देखते हैं, लोगों और परंपराओं से परिचय होता है, और फिर ख़ुश होकर वापस अपनी ज़िंदगी, अपने काम पर वापस आ जाते हैं। दोस्तों की क़िस्से सुनाते हैं, फ़ोटो दिखाते हैं और फिर कुछ दिनों में फिर से वो जोश ठंडा पड़ जाता है। फिर हम अगली छुट्टी के सपने देखने लगते हैं। लेकिन सोचिए अगर हम ऐसी किसी छुट्टी पर निकलें और फिर बिना काम पर वापस आए अगली छुट्टी पर निकलें और फिर अगली। वैसे सोच भी लिया तो हमें ये भी पता होता है कि नौकरी, परिवार और ईएमआई के फेरों के साथ ये फ़िल्मों में हो सकता है असल ज़िंदगी में नहीं। लेकिन एक शख़्स ऐसे हैं जिनकी असल कहानी फ़िल्मी कही जा सकती है।
नाम है इनका जेन्स जेकब, जर्मनी में पैदा व्यवसायी हैं। इनका सपना था दुनिया देखना, अलग अलग लोगों, संस्कृतियों और परंपराओं को देखना-महसूस करना। तो उन्होंने इस सपने को सपना नहीं रहने दिया।
अपनी 1965 मॉडल की फोक्सवागन कॉम्बी कार ली और निकल गए दुनिया घूमने। अपनी इस पचास साल पुरानी सवारी को जेकब प्यार से ब्लूई पुकारते हैं। और ब्लूई को उन्होंने अपनी ज़रूरतों के हिसाब से बदल भी दिया है। इसमें एक छोटी रसोई बनाई है, पानी की टंकी है, टायर और टूल भी। साथ में कुछ किताबें भी।
जन्स जेकब ने अपने लंबे सफ़र को शुरू तो अकेला किया था लेकिन अब उनके साथ उनकी पत्नी सिंथिया भी चल रही हैं। जिनसे वो दुबई में मिले थे। ये जोड़ी अब तक 26 देश घूम चुकी है। 60 हज़ार किलोमीटर से ऊपर का सफ़र। नीदरलैंड, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, तुर्की, दुबई, ओमान, ईरान और फिर भारत भी।
अब ये जोड़ी भारत घूमने के बाद नेपाल और तिब्बत की योजना बना रही है और सफ़र वहीं नहीं रुकेगा। आगे सफ़र इंडोनेशिया और वियतनाम की ओर रुख़ करने वाला है।
तो सोचिए आप भी कब निकल रहे हैं ऐसे सफ़र के लिए।
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