Showing posts with label DUKE 390. Show all posts
Showing posts with label DUKE 390. Show all posts

January 13, 2015

KTM 390 की राइड BIC पर

एक राइड रेसट्रैक पर 

मोटरसाइकिलों को लेकर रेस ट्रैक पर गए काफ़ी दिन हो गए थे और ऐसे में जब कार्यक्रम बना तो फिर उत्सुकता बेचैनी में बदल गई । जहां पर इंतज़ार करने लगा कि कब मैं पहुंचू और चलाना शुरू करुं इस रेसट्रैक पर। और ये उत्सुकता इसलिए भी क्योंकि मुझे केटीएम की ड्यूक ३९० मोटरसाइकिल को चलाना था। इस मोटरसाइकिल को मैंने अभी तक ना के बराबर चलाया था। ख़ास मीडिया के लिए टेस्ट राइड वाली केटीएम ३९० को दिल्ली पहुंचते पहुंचते युग बीत गए थे इस वजह  से । अब जब मौक़ा मिला था तो उत्सुकता डबल थी क्योंकि इसे रेस ट्रैक पर चलाने का मौक़ा मिल रहा था। आमतौर पर गाड़ियों और मोटरसाइकिलों को ऐसे ट्रैक पर टेस्ट करने का मौक़ा कहां मिल पाता है। कुछ चुनिंदा अच्छी सड़कों पर इन्हें चला कर इनके प्रदर्शन को बहुत हद तक बारीकी से पढ़ा जा सकता है, लेकिन रेसट्रैक पर ही असल फ़र्क पता चलता है हैंडलिंग के मामले में। जहां पर देखते हैं कि ये प्रो़डक्ट कितनी बढ़िया पकड़ के साथ बेहतरीन हैंडलिंग दिखाती है और तेज़ से तेज़ जा सकती है। क्योंकि आम सड़कों पर बिना फ़िक्र मोटरसाइकिल से पूरी ताक़त निकालने की कोशिश नहीं कर सकते हैं। साथ में रेस ट्रैक की तरह मोड़ और कॉर्नर भी नहीं मिलते हैं जो हमारी राइडिंग क्षमता औऱ मोटरसाइकिल की काबिलियत को पूरा परख सके। तो इस राइड को देखें तो ऐसा ही कुछ आईडिया था इस ३९० को लेकर भी। 
दरअसल केटीएम भारत में मोटरसाइकिल राइडिंग के कल्चर को बढ़ावा देना चाहती है। कंपनी की पहचान अलग है और इसकी मोटरसाइकिलें भी थोड़ी अलग हैं। ये स्पोर्ट्स और सिटी के बीच की मोटरसाइकिलें भारतीय माहौल में काफ़ी फ़िट बैठती हैं, जहां पर आम सड़कों पर चलाना अपने आप में एडवेंचर से कम नहीं और शुद्ध स्पोर्ट्स बाइक को चलाना तो और भी चुनौती का काम है। ऐसे में केटीएम एक अच्छा कांबिनेशन देती है, रफ़्तार और व्यावहारिकता का। अपनी नेकेड लुक के साथ ये पावर और हैंडलिंग का अच्छा पैकेज दे रही है। इसी लिए ड्यूक २०० के बाद ३९० को लेकर भी ग्राहकों ने काफ़ी रुचि दिखाई। तो उन्हीं ग्राहकों के लिए कपनी ने इस राइड को आयोजित किया। ट्रैक डे। और यहां पर आने वाले राइडरों ने काफ़ी ख़ुशी भी दिखाई इसे लेकर। देश के कई शहरों से राइडर ग्रेटर नौएडा के रेस ट्रैक पर पहुंचे और बाइक भगाई। दिल्ली एनसीआर से साथ चंडीगढ़ और जम्मू से, यहां तक कि मुंबई से भी। तो इन्हीं राइडरों के बीच हमें भी मौक़ा मिला थोड़ी देर के लिए। मीडिया के लिए एक छोटा सा सेशन। 
मोटरसाइकिल को लेकर हम भी निकले, तेज़ भगाने की कोशिश की, गए भी। तेज़ तर्रार मोटरसाइकिल को लेकर रेसट्रैक के कोनों पर मुड़े भी। साथ में इंस्ट्रक्टर भी थे। जिन्होंने थोड़े बहुत टिप्स भी दिए। तो थोड़ी देर में जितने चक्कर काट सकते थे, काटे। मोटरसाइकिल के हैंडलिंग से इंप्रेस हुए। थोड़ा और वक्त होता तो और आनंद आता। क्योंकि इन ट्रैक पर जितने चक्कर काटते जाएं, प्रैक्टिस जितनी होती जाती है, और रोमांच बढ़ता जाता है। आप तेज़ से तेज़ जाने की कोशिश करते हैं और ज़्यादा तेज़ मोड़ने की कोशिश भी करते हैं। और यहां मौजूद राइडर्स भी वही कर रहे थे।
कंपनी ने इसी जगह ऐलान किया कि वो अपनी आरसी सीरीज़ भी जल्द भारत मे ंला रही है। केटीएम की वो मोटरसाइकिलें जो ख़ासतौर पर रेस ट्रैक के लिए तैयार होती हैं। ज़ाहिर है कंपनी को उम्मीद है कि जिस तरीके का उत्साह ग्राहकों में ऐसे ट्रैक डे को लेकर है, ऐसे में रेसिंग मोटरसाइकिलों का बाज़ार भारत में तेज़ी से बढ़ेगा।

July 03, 2014

लाख रुपए माइनस !!!!!


अब ये एक बड़ी ख़बर है उन नौजवानों के लिए जो हैं थोड़ा हटके वाले सेगमेंट में। मोटरसाइकिलों के प्रेमी जो शौक़ीन भी हैं और जिन्हें बड़ी मोटरसाइकिलों का शौक़ है। उनके लिए ख़बर आकर्षक ही है क्योंकि अब २५० सीसी सेगमेंट की मोटरसाइकिलों में एक नई हलचल देखने को मिली है। और ये हलचल है उसी मोटरसाइकिल से जुड़ी जिसे हाल में मैंने चलाया था और आप सभी को जिसके बारे में बताया था। ये है सुज़ुकी की इनाज़ूमा । जिसके बारे में एक ही मुद्दा मुझे खटक रहा था और वो थी इसकी क़ीमत। तो सुज़ुकी ने लगता है सुनी और समझी है वो बात और कंपनी ने अपनी इनाज़ूमा की क़ीमत सीधे एक लाख रु कम कर दिया है। सोचिए एक लाख। जो मोटरसाइकिल साल की शुरूआत में ३ लाख १० हज़ार के आसपास उतारी गई थी उसे अब कंपनी ने २ लाख १० हज़ार के लगभग कर दिया है। और इस नए क़दम से अचानक मार्केट में कई समीकरण बदल सकते हैं। 
कंपनी ने देखा था कि शुरूआती महीनों में इनाज़ूमा को लेकर ज़्यादा गर्मजोशी नहीं थी और कंपनी को बिक्री नहीं मिल रही थी। उसकी सबसे बड़ी वजह उसकी क़ीमत ही थी तो कंपनी ने अपनी रणनीति बदली है। इस सेगमेंट में, जिसमें ज़रूरी नहीं कि केवल २५० सीसी इंजिन हों क़ीमत के हिसाब से भी, जिस तरीके से प्रोडक्ट आ रहे हैं और जितने विकल्प बढ़ रहे हैं, कंपनी को लगा कि इस कांपिटिशन में देरी करना ख़तरे से ख़ाली नहीं है। हालांकि ऐसा नहीं कि केवल क़ीमत कम करने से ही ग्राहक इसकी ओर आएंगे क्योंकि इससे सस्ती केटीएम ३९० ने सेगमेंट को हिला रखा है। लेकिन ये भी है कि सुज़ुकी की रिफ़ाइनमेंट और शांत राइड ख़ास तरीके के राइडरों के लिए पसंदीदा हो सकती है, और नई क़ीमत से कमसेकम ऐसे ग्राहकों पर सुज़ुकी ध्यान दे सकती है। 

सुज़ुकी मोटरसाइकिल कंपनी भारत में अब तक बहुत अाक्रामक नहीं रही है, कमसेकम जिस तरीके का आक्रामक रुख़ 
बाकी जापानी मोटरसाइकिल कंपनियों का रहा है वैसा नहीं रहा है और इस बार के क़दम से लग रहा है कि सुज़ुकी का मूड थोड़ा बदला है, कंपनी ने फ़ैसला जल्दी लिया है, जो बहुत ज़रूरी था भारत जैसे तेज़ मोटरसाइकिल बाज़ार में। कांपिटिशन को तेज़ी से समझना और तेज़ प्रतिक्रिया बताता है कि आप वाकई तैयार हैं या नहीं हैं। सुज़ुकी ऐसे ही कुछ संकेत दे रही है।


Ctrl+C और Ctrl+V ना करें । कहीं ना कहीं छपी हुई है।