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October 29, 2012

लिस्ट अभी बाक़ी है...

त्यौहारों का मौसम इस बार कुछ ख़ास ही है गाड़ी कंपनियों के लिए। जहां पर मंदी की कंपकपाती ज़मीन पर
क़दम मज़बूत करने के लिए कंपनियों को कुछ नया करने की बहुत सख़्त ज़रूरत है। और इसी सोच के साथ
हम देख रहे हैं कि दशहरे से ठीक पहले गाड़ी कंपनियों ने ढेरो गाड़ियां उतार दी। एक हफ़्ते में हमने देखा कि छह नई गाड़ियां लौंच कर दी गई हैं। जो हर तरीके के सेगमेंट की गाड़ियां हैं। जहां पर चिर-परिचित ऑल्टो अब नए ऑल्टो 800 के नाम के साथ आ गई है बाज़ार में वहीं लौंच का दूसरा सिरा महिंद्रा की कंपनी सैंगयौंग की उतारी रेक्सटन थी। जो थोड़े प्रीमियम एसयूवी बाज़ार में आई है। तो मशक्कत सभी तरफ़ से दिख रही है। ऑल्टो 800 की क़ीमत लगभग पुरानी ऑल्टो जैसी ही है। और इस क़ीमत में कंपनी ने कमसेकम कोशिश में नया से नया करने की कोशिश की है। लुक को नया किया है और अंदर भी। 2 लाख 44 हज़ार रु से शुरू हुई है। वहीं ऑल्टो 800 CNG की क़ीमत की शुरूआत 3 लाख 19 हज़ार से हुई है। वैसे हौंडा के पास ऐसा कोई नया प्रोडक्ट तो नहीं था लेकिन कुछ बदलाव के साथ कंपनी ने छोटी कार ब्रियो को ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ उतारा है। जहां क़ीमत की शुरूआत हो रही है 5 लाख 74 हज़ार से , दूसरा ऑटोमैटिक 5 लाख 99 हज़ार में आ रहा है।

बड़ी कारों के इलाके में एक बदलाव दिखा है टाटा की ओर से। जो अपनी मांज़ा का एक क्लब क्लास वेरिएंट लेकर आई है। इसके पेट्रोल और डीज़ल वेरिएंट की क़ीमतें 5 लाख 70 हज़ार से 6 लाख 49 हज़ार के बीच है।
लेकिन हां एक बड़ा लौंच जिसका इंतज़ार बहुत लंबा खिंच गया था वो भी दिखा इस हफ़्ते। टाटा मोटर्स ने अपनी स्पोर्ट्स यूटिलिटी वेह्किल सफ़ारी को नए रंग-रूप में उतार दिया है। सफ़ारी स्टॉर्म के नाम से। अब ये एक ऐसी गाड़ी रही है जिसने लंबे वक्त तक टाटा का साथ दिया है। हिंदुस्तानी ग्राहकों के एसयूवी के शौक को पूरा किया है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ये सेगमेंट बदल गया है। स्कॉर्पियो ने ग्राहकों के लिए नया विकल्प दिया और पिछले दो साल में हमने इस सेगमेंट में कई नए एसयूवी की चर्चा सुन ली है। सभी कंपनी सस्ती एसयूवी के इलाके में पैर जमाने में लगी हुई हैं वहीं टाटा मोटर्स ने इस इलाक़े में ज़्यादा कुछ किया नहीं। नतीजा ये रहा कि एक वक्त में अपने रौबीले रंग-रूप की वजह से पसंद की जाने वाली सफ़ारी पुरानी हो गई। जिस नए अवतार को स्टॉर्म के तौर पर उतारा गया है वो काफ़ी दिनों से तैयार हो रही थी लेकिन ना जाने क्या वजह रही कि टाटा मोटर्स ने इतनी देरी की। जिसका असर ज़रूर पड़ेगा इसकी बिक्री पर क्योंकि इस बीच कई सुपरहिट प्रोडक्ट इस सेगमेंट में आ चुके हैं। एक तरफ़ रिनॉ की डस्टर है तो दूसरी ओर महिंद्रा की एक्सयूवी है। ऐसे में टाटा  कैसे वापसी कर पाएगी, ये सवाल तो है। क्योंकि इसकी क़ीमत भी थोड़ी ज़्यादा ज़रूर है फ़िलहाल। जिसकी क़ीमत शुरू हो रही है 9 लाख 95 हज़ार रु से। वैसे ये बात और है कि पुरानी सफ़ारी भी बाज़ार में बरकरार रहेगी।

तो एक हफ़्ते में छह लौंच के बाद भी कहानी ख़त्म नहीं हुई है। कई और आ सकते हैं, और जो नए नहीं हैं उनके भी इश्तेहार अख़बारों में दिखेंगे ही, डिस्काउंट ऑफ़र के साथ।

((पिछले हफ़्ते लिखी थी..))

September 12, 2011

Brio-genic प्रश्न ???


"लेकिन क्या भारतीय कार ग्राहक इस बात से ख़ुश नहीं होंगे कि इस कार में जो इंजिन लगा है वो वही iVTECहै जो हौंडा सिटी में लगा है, इसकी बनावट ऐसी है जिसे हम जीकॉन बॉडी कहते हैं और जो ज़्यादा सुरक्षित होती है ?" ये सवाल से ज़्यादा उत्सुकता थी, छोटी कारों के ग्राहकों के बारे में एक नए तरीके से जानने की । क्योंकि हौंडा पहली बार भारत में लगा रही है एक ऐसी कार जो छोटी कारों के इलाके में आती है । हौंडा ब्रियो। 
जब तक मेरे कैमरा सहयोगी विशाखापत्तनम के समुद्री किनारे की ख़ूबसूरती को बैकग्राउंड बना कर, हौंडा की नई नवेली हौंडा ब्रियो को सामने रखकर, शूटिंग कर रहे थे तब तक मेरे पास वक्त था कि मैं इस कार के बारे में कुछ बातें कर सकूं, हौंडा कार इंडिया के एक सीनियर अधिकारी के साथ। ज़ाहिर सी बात है कि बातचीत इसकी क़ीमत पर हो रही था जिस पर मेरा कहना था कि इस कार के लिए शुरुआती क़ीमत 3 लाख 80 हज़ार के आसपास होनी चाहिए। जो आंकड़ा लंबे सवाल-जवाब का सबब बना था। दरअसल ब्रियो के बारे में पहला ब्रीफ़ या जानकारी यही आई थी कि हौंडा की आने वाली छोटी कार पांच लाख से कम की होगी और मौजूदा जैज़ से छोटी भी। जिसकी गारंटी तो अभी ही मैं ले सकता हूं, ब्रियो पांच लाख से कम में ही शुरू होगी और साइज़ में जैज़ से छोटी होगी। लेकिन दोनों प्वाइंट का क्या मतलब है आज ? क्या इतना काफ़ी है ? बिल्कुल नहीं।  
ब्रियो में लगा है जैज़ वाला ही 1.2 लीटर i-VTEC इंजिन, 87 बीएचपी की ताक़त है। काफ़ी हद तक जापानी और प्यारे चेहरे वाली ब्रियो अलग ज़रूर दिखती है इस सेगमेंट में। जो ज़रूरी है। साथ में इस कार के अंदर का जगह काफ़ी संतुष्ट करने वाली है। आगे ड्राइवर सीट पर भी और पिछली कतार में भी। जो मुझे काफ़ी अच्छा लगा, कह सकते हैं कि ब्रियो की ये ख़ूबी बहुत पसंद की जाएगी। आजकल जो भी फ़ीचर्स होते हैं इस सेगमेंट में वो सारे हैं। साथ में एक और ख़ूबी मुझे लगी इसकी आसान ड्राइव। पिछले दरवाज़े ( डिक्की) का बड़ा हिस्सा शीशे का है जो रिवर्स करना बहुत आसान कर देता है। तो इन सभी आंकड़ों और फ़ीचर्स के साथ 27 सितंबर की तारीख़ तक ये उतरेगी बाज़ार में। और इन जानकारियों के बाद वापस आते हैं अपने पहले सवाल पर। 
छोटी कारों का बाज़ार ऐसा है जिसे समझना बहुत आसान कभी नहीं रहा है, ऊपर से दिन रात नई रणनीति के साथ उतरने वाली छोटी कारें इसे और कांप्लिकेट कर रही हैं। ऐसे में ब्रियो की क़ीमत क्या होगी ? 
अगर हाल फ़िलहाल में छोटी कारों के बाज़ार को देखें तो तीन सोच या आयाम देख सकते हैं, स्विफ़्ट, फ़ीगो और इंडीका। जिसके बीच में ब्रियो को जूझना पड़ेगा। स्विफ़्ट ने एक ऐसी हैसियत बना रखी है जिसे तोड़ना दूसरी किसी कार के बूते की बात फ़िलहाल नहीं लग रही है। फ़ीगो ने अपनी क़ीमत और किफ़ायत के बल पर एक अलग पैमाना तैयार कर दिया है, वहीं पैसा वसूल कारों के नाम पर इंडीका विस्टा की अलग हैसियत है। सवाल ये है कि ब्रियो कहां खड़ी हो पाएगी (अगर हौंडा सिटी जैसा प्रदर्शन इस सेगमेंट में भी दोहराना है तो ! )? स्विफ़्ट की क़ीमत में वो उतर नहीं  सकती। फ़ीगो को वो छू नहीं सकती। हौंडा का ब्रांड  भारत में प्रीमियम हो चुका है, ऐसे में इंडिका जैसे इलाकों में जाना मुश्किल है। टोयोटा की लीवा, निसान की माइक्रा जैसी कारें इसी कांप्लिकेटेड प्राइसिंग का शिकार हुईं। वहीं ब्रियो के लिए एक और टेंशन है जैज़। जब साढ़े पांच लाख से जैज़ शुरू हो रही है तो उस पैसे में ब्रियो क्यों लूंगा मैं ? तो सवाल है कि टू-बी और नॉट टू बी । 
( प्रभात ख़बर में पब्लिश्ड)