बड़ी दुविधा में कि लिखूं या नहीं, उस कार के बारे में जिसके बारे में पहले भी लिखा है, जिसके बारे में बहुत कुछ बोल चुका हूं, या उस पोलारिस एटीवी के बारे में जो जल्द भारत में लौंच होने वाली है, दिखने में दिलचस्प है, भारत के लिए कौंसेप्ट नया है और लगा कि दिलचस्पी ज़्यादा होगी इस सवारी को लेकर। अगर आमतौर पर थोड़े से बदलाव के साथ स्विफ़्ट आ जाती तो फिर दुविधा नहीं होती। लेकिन कार की क़ीमत और बुकिंग होने वाली स्विफ़्ट की संख्या ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। 4 लाख 22 हज़ार से शुरू होकर नई स्विफ़्ट की क़ीमत 6 लाख 38 हज़ार रु तक जाती है। जिसमें पेट्रोल और डीज़ल दोनों विकल्प शामिल हैं। और ऊपर से जिस दिन कार का ऑफ़िशियल लौंच था, उस दिन तक देश भर में 50 हज़ार स्विफ़्ट बुक हो चुकी थी।
तो इसका मतलब साफ़ है कि क़ीमत अभी भी काफ़ी आक्रामक है और इतनी बारी बुकिंग के बावजूद स्विफ़्ट बहुत जल्द नहीं मिलने वाली है। हालांकि लौंच से पहले ही कंपनी ने साफ़ कर दी थीं कोशिशें वेटिंग पीरिएड घटाने की। 15-18 हज़ार के आसपास डीज़ल इंजिन जो कंपनी एक्सपोर्ट कर रही थी सालाना उसे वो भारतीय बाज़ार के लिए रखने का ऐलान कर चुकी थी। अलग अलग प्लांट के प्रोडक्ट में जोड़-घटाव करके महीने भर में कुल 18 हज़ार के आसपास स्विफ़्ट के प्रोडक्शन का दावा कर चुकी थी। लेकिन इस कार के लिए ग्राहकों की उत्सुकता ने शायद फ़िलहाल ये मुमकिन नहीं होने दिया है। अभी भी इंतज़ार तो रहेगा ही।
मारुति स्विफ़्ट (पेट्रोल)
क़ीमत- 4.22 से 5.53 लाख रु
1.2 लीटर इंजिन, 86 बीएचपी ताक़त
माइलेज * 18.6 kmpl
मारुति स्विफ़्ट (डीज़ल)
क़ीमत- 5.17 से 6.38 लाख रु
1.3 लीटर इंजिन, 75 बीएचपी ताक़त
माइलेज * 22.9 kmpl
इस कार के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी लोकप्रियता ही थी, जो ग्राहकों के खींच कर इसकी तरफ़ लाती थी। जुझारू ग्राहक इसके लिए इंतज़ार करते रहते थे और बाकी निकल जाते थे दूसरी कार शोरूम की तरफ़। और इसी माइग्रेशन को रोकने की कोशिश थी मारुति की । क्योंकि हाल फिलहाल में कार बाज़ार जैसे गोते खा रहा है वैसे में एक भी ग्राहक को खोना कोई भी नहीं चाहेगा। लेकिन अभी से ही कई हफ़्तों के इंतज़ार की ख़बर आने लगी है।
चूंकि मेरी दुविधा थी कि इस कार के बारे में बहुत सारी बातें मैं लौंच से पहले ही बता चुका हूं, लेकिन कार ऐसी है तो उसके कुछ ख़ास पहलू पर नज़र डाल लेते हैं। जैसे सबसे पहले इसका प्लैटफ़ॉर्म , जिस पर कार दरअसल खड़ी होती है। नई स्विफ़्ट का प्लैटफ़ॉर्म नया है जिससे इस कार की लंबाई 90 एमएम बढ़ गई है। इससे पिछली सीट पर जगह अब थोड़ी बढ़ गई है। जो पिछले वर्ज़न स्विफ़्ट में मुझे एक बड़ी कमी लगती थी। अब पिछली सीट का माहौल थोड़ा खुला-खुला लगेगा। हालांकि मोटी बनावट वाली सीटें ना होती तो माहौल और खुला-खुला होता ।
वहीं कार के डैशबोर्ड में भी कई तब्दीलियां मिलेंगी। रंग-रूप बदला है । पहले से ज़्यादा गहरे रंग का डैशबोर्ड है, साथ में म्यूज़िक सिस्टम के किनारे मेटल का इस्तेमाल लुक को बहुत स्मार्ट बनाता है। कप होल्डर अब डैशबोर्ड से निकल कर आते हैं और म्यूज़िक सिस्टम को आप स्टीयरिंग पर लगे स्विच से कंट्रोल कर सकते हैं।
अगर तकनीकी की बात करें तो पेट्रोल इंजिन नया है, जिसकी ताक़त 86 हॉर्सपावर की है। वहीं डीज़ल इंजिन पुराना ही है। दोनों ही अवतार में बेहतर माइलेज लेकर आई है मारुति।
अंदर में बेशक कई बदलाव हैं, लेकिन बाहर से देखने में आपको बहुत नई नहीं लगेगी, हेडलैंप और टेललैंप में बदलाव किया गया है। जो थोड़ा रिफ्रेश्ड चेहरा मोहरा देते हैं नई स्विफ़्ट को।
लेकिन मुझे इस कार के जिस पहलू ने सबसे इंप्रेस किया वो थी इसकी ड्राइव और हैंडलिंग। नए फ्रेम की वजह से नई स्विफ़्ट की ड्राइव कहीं बेहतर हुई है, पकड़ बढ़ी है और मोड़ते वक्त भी अब ये पहले से ज़्यादा भरोसा जगाती है।
तो पहले से कहीं बेहतर पैकेज।
(प्रभात ख़बर में प्रकाशित)
